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किसान की आत्मकथा पर निबंध | Kisan Ki Atmakatha in Hindi in 200 Words

यह ब्लॉग पोस्ट "किसान की आत्मकथा" एक जीवनी है जो किसानों के जीवन की जंग को बताती है। यह कहानी किसानों के दुख, संघर्ष और सफलता को दर्शाती है जो उन्होंने अपने जीवन में अनुभव किया। इस आत्मकथा के माध्यम से आप देखेंगे कि किसान जीवन कितना कठिन होता है।

Kisan Ki Atmakatha in Hindi

किसान की आत्मकथा पर निबंध (200 Words)

मैं एक किसान हूँ। खेती करना मेरा पेशा है। मैं अन्न पैदा करता हूँ और लोगों को भूखों मरने से बचाता हूँ। इसीलिए लोग मुझे 'अन्नदाता' कहते हैं। मैं गाँव में एक टूटी-फूटी झोपड़ी में रहता हूँ।

मैं रोज सुबह जल्दी उठता है, अपने गाय-बैलों को चारा खिलाता हूँ पानी पिलाता है। सूरज निकलने पर मैं हल-बैल लेकर खेत पर चला जाता है। वहां दिनभर कड़ी मेहनत करता है। मैं तेज धूप, कड़ाके की सर्दी और जोर वर्षा में भी अपना काम करता रहता हूँ। मेरा जीवन कष्टों से भरा हुआ है।

मैं बहुत गरीब हूँ । मैं अनपढ़ हूँ। कभी-कभी तो मेरे बाल-बच्चे भूखे रह जाते हैं। मेरे पास पैसों की बहुत कमी रहती है। मेरे बीबी-बच्चों के शरीर पर अच्छा कपड़ा भी नहीं होता। कभी-कभी उन्हें फटे-पुराने कपड़े पहनने पड़ते हैं।

में सारे भारत का सेवक हूँ। स्वतंत्रता के बाद सरकार ने किसानों की दशा सुधारने की ओर ध्यान दिया है। इस बात से मुझे बहुत संतोष है। अब मेरे बाल- बच्चे सुखी है।